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Showing posts from October, 2018

लोगों के दिलों पर राज करेंगे आप

लोगों के दिलों पर राज करेंगे आप आप भी बन सकते हैं लोकप्रिय लोगों के बीच पॉपुलर होने के लिए न तो आसमान से तारे तोड़ने की जरुरत है न लाखों रूपए खर्च करने की. बस अपने स्वभाव और एक्टिविटीज में छोटे छोटे परिवर्तन करना काफी है- थैक्यू बोलना सीखें - जो लोग आपको खुशी देते हैं,आपके लिए कुछ अच्छा करते हैं ,आपकी  वक्त-बेवक्त मदद करते हैं और आपके प्रति स्नेह का भाव रखते हैं, उनके प्रति आभार जताने की आदत डालें। उन्हें समय-समय पर उपहार व मिठाई आदि दें। इससे उनके साथ आपके रिश्तों में और भी प्रगाढ़ता आएगी और आपका सपोर्ट सिस्टम भी इम्प्रूव होगा। दयालु बनें- दयालुता संक्रामक होती है। जब आप कुछ अच्छा करते हैं, तो दूसरों का मन भी कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित होता है। स्टैनफोर्ड और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को शोधकर्ताओं ने पाया है कि लोगों में दूसरों की पॉजिटिव चीजों की नकल करने की आदत होती है। इस प्रवृत्ति को ‘कन्फॉर्मिटी’ कहते हैं। जब आप देते हैं, तो दूसरे लोग और वे खुद (जिनके लिए आपने अच्छा किया) भी किसी दूसरे के प्रति ऐसा करने को उतावला हो जाता है। इससे सकारात्मकता बढ़ती है। नै...

तुलनात्मक हीनता से उबरना है जरूरी

तुलनात्मक हीनता से उबरना है जरूरी     बहुत प्रचलित उक्ति है, ‘दुनिया में ज्यादातर लोग अपने दुख से कम दुखी होते हैं, लेकिन दूसरों के सुख से उन्हें ज्यादा दुख पहुंचता है।’ यह सच भी है। कई लोग दूसरों को तरक्की करते देख जलते भुनते हैं और उनके साथ अपनी तुलना करके हीन भावना से ग्रस्त हो जाते हैं। तुलना और उलाहना से होगा नुक्सान-   कई लोग कई बार संबंधित व्यक्ति से जुड़े लोगों से लड़ बैठते हैं कि आप फलां का फेवर करते हो, उन्हें सपोर्ट देते हो और हमें काम नहीं देते। ऐसा करने से सिवाय दोहरे नुकसान के और कुछ भी हासिल नहीं होता। एक तो लोगों के बीच शिकायतकर्ता की इमेज खराब हो जाती है और लोग उसे ईर्ष्यालु व रोनू (शिकायती) प्रवृत्ति का समझकर उससे दूर रहने लगते हैं। दूसरा नुकसान यह कि ऐसा व्यक्ति अपनी कमियों का आकलन करके खुद क्षमता सम्पन्न बनने की बजाय सिर्फ दूसरों में ऐब खोजता रह जाता है। सकारात्मक सोचें और बोलें – जब भी आपको दूसरों से मदद या काम मांगना हो, कोई सलाह लेनी हो या कोई प्रोडक्ट अथवा सर्विस बेचनी हो, तो आप अपनी बातों को अपनी जरूरत प्रॉडक्ट या सर्विस पर फोकस करें।...

सिर्फ अपने लिए जिये तो क्या जिये

सिर्फ अपने लिए जिये तो क्या जिये       कोल्कता के हावड़ा रेलवे स्टेशन के नजदीक स्थित सारे होटल खचाखच भरे थे। कहीं भी रूम उपलब्ध नहीं था। वजह थी, गंगासागर मेला। इस मेले में शामिल होने के लिए राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्, झारखण्ड और गुजरात समेत कई राज्यों से तीर्थयात्री आते हैं, ये तो अच्छा हुआ कि शुभम दिल्ली से दो दिन पहले ही यहां आ गया था। दरअसल उसे दो अलग अलग कम्पनियों में इंटरव्यू देने थे औऱ कोलकाता घूमने की इच्छा भी थी। सोचा पहले इंटरव्यू देगा फिर घूम लेगा इसलिए वह एक दिन का टाइम हाथ में लेकर आया था। लेकिन आज उसका मूड बिल्कुल ठीक नहीं था क्योंकि दोनों जगहों पर उसे नौकरी मिलने का कोई चांस नजर नहीं आया। निराश मन से वह अपने रूम में जाकर आराम करने की सोच रहा था, तभी रिसेप्शन काउंटर पर किसी शर्मा दम्पत्ति को गिड़गिड़ाते देखा। बातचीत से मालूम पड़ रहा था कि दोनों कई होटलों में धक्के खाकर आ चुके थे औऱ उन्हें कहीं कमरा नहीं मिला था.इसीलिए पति और पत्नी दोनों मैनेजर से किसी भी तरह रूम की व्यवस्था करने का निवेदन कर रहे थे। शुभम को वे भले लोग ...

ना बनें आइडिया मंकी

ना बनें आइडिया मंकी       आकाश अपने ऑफिस के तेज-तर्रार और स्मार्ट मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव्स की सूची में शामिल है. वैसे तो उसके काम से बौस खुश हैं लेकिन उसकी एक आदत से सब परेशान हैं, वह बिना पूछे बात-बात में अपनी राय देने लगता है. जहां ऑफिस के चार लोग बैठ कर बात कर रहे हों वहीं पहुंचकर वह अपने विचार सब पर थोपने लगता है. बौस के साथ मीटिंग होती है, तब भी सबसे ज्यादा आवाज आकाश की ही आती है. मानो मीटिंग में मौजूद दूसरे लोगों के खुद के कोई विचार या अनुभव ही ना हों.       अगर आप भी आकाश की तरह आयडिया की खान हैं और दुनिया भर के विषयों पर अपने विचार रखते हैं, तो एक बात जान लें, आपकी यह आदत भले ही खुद आपके या कुछ लोगों के लिए सुकून या गर्व की बात हो, पर ज्यादातर लोगों के लिए यह कोफ्त का सबब बन जाती है. और शायद कभी अपनी इस आदत की वजह से आपको किसी बड़ी मुसीबत में भी फंसना पड़ सकता है.       रवीन्द्र भी बात-बात में आइडिया बांटने का शौकीन था. लेकिन आठ-पंद्रह दिनों तक जेल की हवा खाने के बाद उसके सिर से यह भूत उतर गया...

इन मामलों में न करें कंप्रोमाइज

इन मामलों में न करें कंप्रोमाइज प्यार अगर आकर्षण है तो यह समर्पण भी है। कई बार अपने पसंदीदा इंसान का प्यार, उसका सामीप्य और आजीवन उसका साथ पाने के लिए कुछ बातें कम पसंद हों या नापसंद हो तो समझौता भी करना पड़ जाता है और एक दूसरे के साथ तालमेल बैठाने के लिए थोड़ा बहुत एडजस्टमेंट जरुरी भी होता है। लेकिन कुछ मामले ऐसे भी होते हैं, जिनमें किसी प्रकार का कंप्रोमाइज नहीं करना चाहिए वरना आगे चलकर जिंदगी में पछताना पड़ता है।       अपने करियर या ड्रीम जॉब के मामले में No compromise – लाइफकोच, मनोविज्ञानी और समाजशास्त्री जिंदगी संवारने के लिए चार महत्वपूर्ण कदम बताते हैं। जिसमें सबसे पहले शिक्षा, फिर करियर, उसके बाद प्यार और अंत में शादी का नंबर आता है। पढ़ाई करते हुए ही कोई अपने करियर और ड्रीम जॉब की प्लानिंग करने लगता है। जैसे किसी को इंजीनियरिंग करनी हो या डॉक्टरी करनी हो तो वह साइंस चुनेगा, सीएस, एमकॉम या एमबीए करना हो तो कॉमर्स चुनेगा। इस बीच आपको किसी से प्यार हो जाए और उसकी वजह से आपकी पढ़ाई अधूरी रहने का डर हो या करियर सेलेक्ट करने में बाधा आ रही है,य...

इतना मिला है फिर क्या गिला है?

इतना मिला है फिर क्या गिला है ?       कुछ लोग हमेशा चिंता में डूबे और मुंह लटकाए रहते हैं। उन्हें अपने जिंदगी से, तकदीर से और ऊपर वाले से हजारों शिकायतें होती हैं। इन्हें लगता है कि सिर्फ इनके अलावा दुनिया में सब सुखी हैं। जबकि सच यह है कि ईश्वर ने, किस्मत और इस कुदरत ने सबको हजारों नेमतें दी हैं। लेकिन हर व्यक्ति के पास सब कुछ कैसे हो सकता है ? इच्छाएं और उम्मीदें अशेष होती हैं, इनका कभी कोई अंत नहीं होता। सोच का शिकार हो चुका हर इंसान सोचता है। यकीन मानिए जिन्हें आप खुद से बहुत आगे, खुशकिस्मत और सुखी इंसान समझती हैं उनके पास अगर आपसे अलग कुछ है तो वो है उनकी सकारात्मक सोच और जिंदादिली। हां, इससे इंकार नहीं कि कुछ मामलों में वे आपसे बढ़कर या बेहतर होंगे, लेकिन यह भी गलत नहीं कि कई चीजें जो आपको हासिल हैं, वो उनके नसीब में नहीं। जरा डालकर देखिए एक नजर कि आपको कितना कुछ मिला है, फिर भी आपको ईश्वर से मिला है – आपको मिला अपनी पसंद का जीवनसाथी – अगर आपका जीवनसाथी अच्छे स्वभाव का व केअरिंग है और शादी से पहले माता-पिता ने आपसे रजामंदी ली या फिर आपने अ...