इतना मिला है फिर क्या गिला है?
कुछ लोग
हमेशा चिंता में डूबे और मुंह लटकाए रहते हैं। उन्हें अपने जिंदगी से, तकदीर से और
ऊपर वाले से हजारों शिकायतें होती हैं। इन्हें लगता है कि सिर्फ इनके अलावा दुनिया
में सब सुखी हैं। जबकि सच यह है कि ईश्वर ने, किस्मत और इस कुदरत ने सबको हजारों
नेमतें दी हैं। लेकिन हर व्यक्ति के पास सब कुछ कैसे हो सकता है? इच्छाएं और उम्मीदें अशेष होती
हैं, इनका कभी कोई अंत नहीं होता। सोच का शिकार हो चुका हर इंसान सोचता है। यकीन
मानिए जिन्हें आप खुद से बहुत आगे, खुशकिस्मत और सुखी इंसान समझती हैं उनके पास
अगर आपसे अलग कुछ है तो वो है उनकी सकारात्मक सोच और जिंदादिली। हां, इससे इंकार
नहीं कि कुछ मामलों में वे आपसे बढ़कर या बेहतर होंगे, लेकिन यह भी गलत नहीं कि कई
चीजें जो आपको हासिल हैं, वो उनके नसीब में नहीं। जरा डालकर देखिए एक नजर कि आपको
कितना कुछ मिला है, फिर भी आपको ईश्वर से मिला है –
आपको मिला अपनी पसंद
का जीवनसाथी – अगर आपका जीवनसाथी
अच्छे स्वभाव का व केअरिंग है और शादी से पहले माता-पिता ने आपसे रजामंदी ली या
फिर आपने अपनी पसंद के साथी से विवाह किया है, तो इसके लिए खुश होना चाहिए। दुनिया
में बहुत से लोगों को यह सुख नहीं मिला है। कई लोग जीवनसाथी के लिए तरस रहे हैं,
कई प्रेम विवाह करना चाहते हैं लेकिन अड़चनें आ रही हैं और कई ऐसे हैं जिन्हें
झगड़ालू और नालायक जीवनसाथी मिला है।
सिर पर छत और पेट भर
खाना – आपके पास रहने को
घर है औऱ भर पेट खाने की व्यवस्था भी है। जरा सोचिए देश में कितने लोग फुटपाथ पर
सोने को मजबूर हैं और भोजन के लिए उन्हें दूसरे पर आश्रित रहना पड़ता है। कइयों को
भीख मांगकर गुजारा नहीं कर पाते। कइयों के पास पैसा है, लेकिन बीमारी की वजह से
रूचि के मुताबिक नहीं खा पाते।
परिवार के साथ रहने
का सुख – अगर आप अपने माता
पिता या जीवनसाथी व बच्चों के साथ रहने का सुख भोग रहे हैं तो कभी उन लोगों के
बारे में सोचकर देखिए जो अनाथ हैं और इस दुनिया में बिल्कुल अकेले हैं। या फिर उन
लोगों के मन की थाह लेकर देखिए जिनके परिवार तो हैं लेकिन वे अपनी नौकरी या
व्यवसाय के कारण या फिर किन्हीं अन्य परिस्थितियों के कारण अपने परिवार से बिछुड़
गए हैं। देश की रक्षा करने वाले सैनिक हों या बार बार ट्रांसफर वाली जॉब करने वाले
कर्मचारी उनकी दशा के बारे में सोचकर देखें, तो पता चलेगा कि आप कितने सुखी हैं।
आज का दिन देखने का
सुख – ईश्वर का शुक्रिया
अदा कीजिए कि आप आज की सुहानी सुबह और चमकता दिन देख पाए। जरा सोचिए, दुनिया में
कितने ही लोग आज की सुबह देखने के लिए बचे ही नहीं। या फिर उन लोगों की मन की
व्यथा भांपकर देखिए, जो दृष्टिहीन हैं। उनके लिए क्या चमकती सुबह और क्या अंधेरी
रात? उनके नसीब में तो सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा है।
फिर भी वे ईशवंदना करते हैं और प्रसन्न रहते हैं।
आपके पास नौकरी या
कारोबार हैं – बेरोजगारी इस
दुनिया की एक बहुत बड़ी समस्या है। लाखों नवयुवक खूब पढ़े लिखे हैं औऱ डिग्रीधारी
भी हैं। लेकिन उनके पास एक अदद नौकरी या कोई व्यवसाय नहीं है, जिससे वे अपनी
आजीविका चला सके। एक आप हैं, जिनके पास नौकरी है या अपना कारोबार है, लेकिन आप
उससे संतुष्ट नहीं है। यकीन मानिए असंतुष्टि इस दुनियाका सबसे बड़ा दुख है, जो
व्यक्ति खुदही अपने लिए विकसित कर लेता है।
आप शिक्षित हैं –
आपके माता-पिता कितने अच्छे हैं, जिन्होंने आपको अच्छी शिक्षा दिलवाई, अच्छे स्कूल
में भेजा और एकलायक का जिम्मेदार इंसान बना दिया। जरा उनकी पीड़ा का अनुभव कीजिए
जो पढ़ना तो चाहते थे लेकिन अपनी बदनसीबी के कारण पढ़ नहीं पाए और अशिक्षित रह गए।
क्या आपको इसके लिए ईश्वर के प्रति और अपनी किस्मत के प्रति शुक्रगुजार नहीं होना
चाहिए।
आप किसी गंभीर
बीमारी से ग्रस्त नहीं – आप
सामान्य बुखार या सर्दी जुकाम से परेशान हैं या डायबिटीज, ब्लडप्रेशर अथवा हार्ट
डिजीज के मरीज हैं और दवाएं लेकर आसानी से जी रहे हैं, तो 24 घंटे अपनी बीमारी का
रोना न रोएं। उनके बारे में सोचकर देखिए जो कैंसर के अंतिम चरण से जूझ रहे हैं,
जिन्हें किडनी की अक्षमता के कारण बार-बार डायलिसिस करवाना पड़ता है, जो लकवा से
ग्रस्त होने के कारण हाथ पैर नहीं हिला सकते या अपनी मर्जी से चल फिर नहीं सकते,
जो बधिर हैं और संगीत जैसी खूबसूरत नेमत का आनंद नहीं ले सकते, जो अपने बल पर सीधे
खड़े नहीं हो सकते, जो अपनी अन्यथा की बीमारी के कारण ढंग से सांस नहीं ले सकते।
इसलिए अपनी अनन्त इच्छाओं और तृष्णाओं पर
जरा लगाम कसिए और उन नेमतों के लिए ईश्वर का शुक्र अदा कीजिए जिन्होंने आपको इतना
कुछ दिया।
माया भरी न मन भरा, मर मर गए शरीर
आशा तृष्णा न भरी, कह गए दास कबीर
आशा तृष्णा न भरी, कह गए दास कबीर

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