Skip to main content

ना बनें आइडिया मंकी



ना बनें आइडिया मंकी
      आकाश अपने ऑफिस के तेज-तर्रार और स्मार्ट मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव्स की सूची में शामिल है. वैसे तो उसके काम से बौस खुश हैं लेकिन उसकी एक आदत से सब परेशान हैं, वह बिना पूछे बात-बात में अपनी राय देने लगता है. जहां ऑफिस के चार लोग बैठ कर बात कर रहे हों वहीं पहुंचकर वह अपने विचार सब पर थोपने लगता है. बौस के साथ मीटिंग होती है, तब भी सबसे ज्यादा आवाज आकाश की ही आती है. मानो मीटिंग में मौजूद दूसरे लोगों के खुद के कोई विचार या अनुभव ही ना हों.
      अगर आप भी आकाश की तरह आयडिया की खान हैं और दुनिया भर के विषयों पर अपने विचार रखते हैं, तो एक बात जान लें, आपकी यह आदत भले ही खुद आपके या कुछ लोगों के लिए सुकून या गर्व की बात हो, पर ज्यादातर लोगों के लिए यह कोफ्त का सबब बन जाती है. और शायद कभी अपनी इस आदत की वजह से आपको किसी बड़ी मुसीबत में भी फंसना पड़ सकता है.
      रवीन्द्र भी बात-बात में आइडिया बांटने का शौकीन था. लेकिन आठ-पंद्रह दिनों तक जेल की हवा खाने के बाद उसके सिर से यह भूत उतर गया है. अब उसने कसम खा ली है कि जरूरत जितना ही बोलेगा और पूछने पर ही अपने आयडिया देगा. हुआ यूं कि उसके ऑफिस में लाखों की चोरी हो गई. सभी कर्मचारियों को सुबह दफ्तर जाने पर इसका पता चला. पुलिस भी मौके पर आ गई. रवीन्द्र को ऑफिस ज्वाइन किए हुए मात्र दस-बारह दिन ही हुए थे. रवीन्द्र ऑफिस पहुंचा तो उसने लोगों की भीड़ लगी देखी. जल्दी ही सारा माजरा समझ में आ गया. अब वह लगा तरह-तरह के मुफ्त के आयडिया बांटने. चोर ऐसे आया होगा... इतने बजे चोरी हुई होगी.... आदि. तफ्तीश में जुटी पुलिस ने उसे इतना एक्टिव देखा, तो उसके बारे में पूछताछ की.  पुलिस को बताया गया कि रवीन्द्र दफ्तर का नया कर्मचारी है. बस, वह पुलिस के शक के घेरे में आ गया. रवीन्द्र ने लाख सफाई दी, खूब मिमिआया, लेकिन पुलिस उसे गिरफ्तार करके ले गई. बड़ी मुश्किल से बौस ने उसे छुड़वाया लेकिन बीच में चार दिनों का सार्वजनिक अवकाश होने की वजह से रवीन्द्र को आठ दिनों तक जेल की हवा खानी पड़ गई.
      अगर वह जरूरत से ज्यादा आइडिया नहीं बांटता, तो शायद पुलिस अफ्सरों की नजर में नहीं चढ़ता.

      आप में भी बिना पूछे अपने विचार थोपने की आदत है, तो आकाश की तरह लोगों के मन से उतरने या रवीन्द्र की तरह मुसीबत में पड़ने से पहले उसे बदल डालिए.


जानें दूसरों का नजरिया
      माना कि वरिष्ठ लोगों या बौस का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए उन्हें अपनी प्रतिभा और बुद्धिमानी के बारे में बताना जरूरी है लेकिन इसके लिए पहले उनकी बात सुनना और चीजों को उनके नजरिए से देखना भी जरूरी है.
      चीजों और परिस्थितियों को दूसरे के नजरिए से न देखकर सिर्फ अपना ही आयडिया हर जगह थोपना असफलता का भी सबब बन सकता है. इससे आपकी सोच का दायरा नहीं बढ़ पाता क्योंकि आप दूसरों की सुनते ही नहीं, अपने ही विचार सबको बताते हैं. जाहिर है, ऐसे में लोग आपको अपने विचार बताना बंद कर देते हैं. इससे आप नई चीजों और विचारों से वंचित रह जाते हैं. ग्रैमी पुरस्कार विजेता संगीतकार गैरी बर्टन कहते हैं, ‘‘मैं ऐसे निपुण संगीतकारों को जानता हूं जो दूसरों के नजरिए से देखने में सक्षम नहीं थे. जिस कारण वे अधिक सफल नहीं हो पाए.’’
      अगर आप सफल होना चाहते हैं तो जिन लोगों के साथ आप रत्ती भर भी सहमत नहीं, कई बार अपनी सहनशीलता की सीमाएं विकसित कर, उनके नजरिए से देखना पड़ता है और उनकी जगह खड़े रहकर सोचना पड़ता है. आप मार्केटिंग में हों, सेवाप्रदाता हों या जन सम्पर्क से संबंधित किसी दूसरे क्षेत्र में, आपको अपने ग्राहक के नजरिए से देखना पड़ता है. आपको ग्राहक के विचारों से सामंजस्य बिठाकर काम करना पड़ता है यहां आपका आयडिया ग्राहक के लिए रत्ती भर भी महत्व नहीं रखता. अगर आप ग्राहक की बात सुनने की बजाय उसे अपने आयडिया देने लगेंगे तो वह अगली बार आपसे बात तक करना पसंद नहीं करेगा.
      हेनरी फोर्ड ने कहा है, ‘‘यदि सफलता का कोई रहस्य है, तो वो है दूसरे के दृष्टिकोण को समझने और उसके तथा अपने नजरिए से चीजों को देखने की क्षमता’’
      एक बड़े और सफल मौल के मालिक का कहना है, ‘‘आपको क्या आयडिया है, यह ज्यादा महत्व नहीं रखता, आप जिसके लिए काम कर रहे हैं उनके विचार ज्यादा महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आपको अपनी सेवाएं उनको संतुष्ट करने के लिए देनी हैं.

सही इस्तेमाल करें
अगर आप में नए विचारों का सृजन करने की क्षमता है, तो इस प्रतिभा या क्षमता का सही इस्तेमाल करें. उनका प्रयोग आपको जो काम सौंपा जाता है उसे बेहतर ढ़ंग से सम्पन्न करने में करें. अपने आयडिया लोगों को तभी बताएं जब आपसे पूछा जाए. वरना आपको लोग ‘दाल भात में मूसलचन्द’, ‘कवाब में हड्डी’, ‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’ और ‘पकाऊ’ जैसे उपनामों से नवाजने लगेंगे. जरा सोचिए कोई आपको बिना पूछे बताने लगे कि आपको अपनी पत्नी से कैसे पेश आना चाहिए, कपड़े कहां से खरीदने चाहिए, अपने बच्चों को किस स्कूल में पढाना चाहिए या किस डॉक्टर से इलाज कराना चाहिए, तो आपको कैसे लगेगा ठीक वैसा ही लोगों को लगता है, जब आप बिना पूछे उन्हें आयडिया देने पहुंच जाते हैं. बेहतर तो यह होगा कि अपनी इस अनूठी क्षमता को आप अपना करियर या बिजनेस संवारने में खपाएं. अगर जौब करते हैं तो कोई पार्ट टाइम काम करें ताकि घर में दो पैसे की आमदनी हो और आयडिया भी सही जगह खप जाए.

Comments

Popular posts from this blog

तुलनात्मक हीनता से उबरना है जरूरी

तुलनात्मक हीनता से उबरना है जरूरी     बहुत प्रचलित उक्ति है, ‘दुनिया में ज्यादातर लोग अपने दुख से कम दुखी होते हैं, लेकिन दूसरों के सुख से उन्हें ज्यादा दुख पहुंचता है।’ यह सच भी है। कई लोग दूसरों को तरक्की करते देख जलते भुनते हैं और उनके साथ अपनी तुलना करके हीन भावना से ग्रस्त हो जाते हैं। तुलना और उलाहना से होगा नुक्सान-   कई लोग कई बार संबंधित व्यक्ति से जुड़े लोगों से लड़ बैठते हैं कि आप फलां का फेवर करते हो, उन्हें सपोर्ट देते हो और हमें काम नहीं देते। ऐसा करने से सिवाय दोहरे नुकसान के और कुछ भी हासिल नहीं होता। एक तो लोगों के बीच शिकायतकर्ता की इमेज खराब हो जाती है और लोग उसे ईर्ष्यालु व रोनू (शिकायती) प्रवृत्ति का समझकर उससे दूर रहने लगते हैं। दूसरा नुकसान यह कि ऐसा व्यक्ति अपनी कमियों का आकलन करके खुद क्षमता सम्पन्न बनने की बजाय सिर्फ दूसरों में ऐब खोजता रह जाता है। सकारात्मक सोचें और बोलें – जब भी आपको दूसरों से मदद या काम मांगना हो, कोई सलाह लेनी हो या कोई प्रोडक्ट अथवा सर्विस बेचनी हो, तो आप अपनी बातों को अपनी जरूरत प्रॉडक्ट या सर्विस पर फोकस करें।...

लोगों के दिलों पर राज करेंगे आप

लोगों के दिलों पर राज करेंगे आप आप भी बन सकते हैं लोकप्रिय लोगों के बीच पॉपुलर होने के लिए न तो आसमान से तारे तोड़ने की जरुरत है न लाखों रूपए खर्च करने की. बस अपने स्वभाव और एक्टिविटीज में छोटे छोटे परिवर्तन करना काफी है- थैक्यू बोलना सीखें - जो लोग आपको खुशी देते हैं,आपके लिए कुछ अच्छा करते हैं ,आपकी  वक्त-बेवक्त मदद करते हैं और आपके प्रति स्नेह का भाव रखते हैं, उनके प्रति आभार जताने की आदत डालें। उन्हें समय-समय पर उपहार व मिठाई आदि दें। इससे उनके साथ आपके रिश्तों में और भी प्रगाढ़ता आएगी और आपका सपोर्ट सिस्टम भी इम्प्रूव होगा। दयालु बनें- दयालुता संक्रामक होती है। जब आप कुछ अच्छा करते हैं, तो दूसरों का मन भी कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित होता है। स्टैनफोर्ड और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को शोधकर्ताओं ने पाया है कि लोगों में दूसरों की पॉजिटिव चीजों की नकल करने की आदत होती है। इस प्रवृत्ति को ‘कन्फॉर्मिटी’ कहते हैं। जब आप देते हैं, तो दूसरे लोग और वे खुद (जिनके लिए आपने अच्छा किया) भी किसी दूसरे के प्रति ऐसा करने को उतावला हो जाता है। इससे सकारात्मकता बढ़ती है। नै...

इतना मिला है फिर क्या गिला है?

इतना मिला है फिर क्या गिला है ?       कुछ लोग हमेशा चिंता में डूबे और मुंह लटकाए रहते हैं। उन्हें अपने जिंदगी से, तकदीर से और ऊपर वाले से हजारों शिकायतें होती हैं। इन्हें लगता है कि सिर्फ इनके अलावा दुनिया में सब सुखी हैं। जबकि सच यह है कि ईश्वर ने, किस्मत और इस कुदरत ने सबको हजारों नेमतें दी हैं। लेकिन हर व्यक्ति के पास सब कुछ कैसे हो सकता है ? इच्छाएं और उम्मीदें अशेष होती हैं, इनका कभी कोई अंत नहीं होता। सोच का शिकार हो चुका हर इंसान सोचता है। यकीन मानिए जिन्हें आप खुद से बहुत आगे, खुशकिस्मत और सुखी इंसान समझती हैं उनके पास अगर आपसे अलग कुछ है तो वो है उनकी सकारात्मक सोच और जिंदादिली। हां, इससे इंकार नहीं कि कुछ मामलों में वे आपसे बढ़कर या बेहतर होंगे, लेकिन यह भी गलत नहीं कि कई चीजें जो आपको हासिल हैं, वो उनके नसीब में नहीं। जरा डालकर देखिए एक नजर कि आपको कितना कुछ मिला है, फिर भी आपको ईश्वर से मिला है – आपको मिला अपनी पसंद का जीवनसाथी – अगर आपका जीवनसाथी अच्छे स्वभाव का व केअरिंग है और शादी से पहले माता-पिता ने आपसे रजामंदी ली या फिर आपने अ...