अच्छी आदत है सलाम नमस्ते ! एक जमाना था जब किसी गांव में रहने वाला हर शख्स एक दूसरे को न सिर्फ नाम से जानता था बल्कि उसके परिवार के बारे में भी काफी हद तक जानकारी रखता था। तब गांव के लोग एक दूसरे से मिलने पर चलते-चलते ही सही ‘राम-राम’ ‘सलाम वालेकुम’ या ‘सत श्री अकाल’ जैसे अभिवादन का आदान प्रदान जरूर करते थे। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि एक ही सोसायटी या अपार्टमेंट अथवा बिल्डिंग में रहने वाले दो लोग न तो एक दूसरे को नाम से जानते हैं और न ही उनमें कभी कोई बातचीत होती है। कौन है अजनबी? अक्सर कुछ लोग कहते हैं कि किसी अजनबी से भला क्या अभिवादन किया जाए। लेकिन यह गलत नजरिया है। एक ही अपार्टमेंट या सोसायटी या फिर ऑफिस प्रेमिसेस में रहने वाले लोग अजनबी नहीं कहे जा सकते। वैसे तो एक ही छत के नीचे रहने वाले सगे भाई-बहन भी जब एक-दूसरे से बातचीत नहीं करते तो अजनबी ही कहलाते हैं. इसलिए यह संकोच त्यागिये और आगे बढकर लोगों से पहचान बढ़ाइए. आप ही होंगे पॉपुलर - अगर आप पहल करके लोगों से सलाम-नमस्ते यानी मुस्कुराकर अभिवादन करने की आदत डालते हैं, तो इसका सका...