तुलनात्मक हीनता से उबरना है जरूरी
बहुत प्रचलित उक्ति है, ‘दुनिया में ज्यादातर लोग अपने दुख से कम दुखी होते हैं, लेकिन दूसरों के सुख से उन्हें ज्यादा दुख पहुंचता है।’ यह सच भी है। कई लोग दूसरों को तरक्की करते देख जलते भुनते हैं और उनके साथ अपनी तुलना करके हीन भावना से ग्रस्त हो जाते हैं।
बहुत प्रचलित उक्ति है, ‘दुनिया में ज्यादातर लोग अपने दुख से कम दुखी होते हैं, लेकिन दूसरों के सुख से उन्हें ज्यादा दुख पहुंचता है।’ यह सच भी है। कई लोग दूसरों को तरक्की करते देख जलते भुनते हैं और उनके साथ अपनी तुलना करके हीन भावना से ग्रस्त हो जाते हैं।
तुलना और उलाहना से होगा नुक्सान- कई लोग कई बार संबंधित व्यक्ति से जुड़े लोगों
से लड़ बैठते हैं कि आप फलां का फेवर करते हो, उन्हें सपोर्ट देते हो और हमें काम
नहीं देते। ऐसा करने से सिवाय दोहरे नुकसान के और कुछ भी हासिल नहीं होता। एक तो
लोगों के बीच शिकायतकर्ता की इमेज खराब हो जाती है और लोग उसे ईर्ष्यालु व रोनू
(शिकायती) प्रवृत्ति का समझकर उससे दूर रहने लगते हैं। दूसरा नुकसान यह कि ऐसा
व्यक्ति अपनी कमियों का आकलन करके खुद क्षमता सम्पन्न बनने की बजाय सिर्फ दूसरों
में ऐब खोजता रह जाता है।
सकारात्मक सोचें और बोलें – जब भी आपको दूसरों
से मदद या काम मांगना हो, कोई सलाह लेनी हो या कोई प्रोडक्ट अथवा सर्विस बेचनी हो,
तो आप अपनी बातों को अपनी जरूरत प्रॉडक्ट या सर्विस पर फोकस करें। आप अपनी सर्विस
या प्रोडक्ट के बारे में सकारात्मक बातें बताएं। तुलना या उनकी कमियों का बखान तब
तक न करें जब तक सामने वाला व्यक्ति आपके सामने प्रतिद्वन्द्वि व्यक्ति या
प्रोडक्ट का उदाहरण न रखें।
खुद को न समझें कमजोर – कई लोग मन ही मन
खुद ही सोच लेते हैं कि दूसरे लोग उन्हें कमजोर व अप्रतिभाशाली समझते हैं। अगर आपके
मन में यह हीन भावना आ गई, तो आप दूसरों के सामने जाने या अपनी क्षमताका सही
प्रदर्शन करने में हिचकने लगेंगे। यह प्रवृत्ति तरक्की की सबसे बड़ी दुश्मन होती
है। इसलिए दूसरों से तुलना करते हुए आत्महीनता न पालें।
खास दोस्तों से बात करें – जब भी आप ‘लो’
फील करें या दूसरे की तुलना में खुद को नकारा समझकर उदास हो जाएं, तो अपने खास
दोस्तों से बात करें। उन्हें ईमानदारीपूर्वक अपनी अच्छाईयां व बुराईयां एवं
कमजोरियां व ताकत बताने को कहें। इससे आप वास्तविकता से परिचित हो जाएंगे। दोस्तों
से हुए इस डिस्कशन का फायदा उठाएं और अपनी कमियों को दूर करते हुए अच्छाइयों को
लोगों के सामने खुद उजागर करें।
दूसरों की तरह न बनें – आप अपनी ही तरह के
रहें तो अच्छा है। आपको दूसरे जैसा क्यों बनना चाहिए? हर इंसान में कुछ
ऐसी विशेषताएं होती हैं जो दूसरों में नहीं होती। फर्ज कीजिए कि आप कुकिंग में
इतनी माहिर हैं कि घर के सभी सदस्य आपके साथ का बनाया खाना ऊंगलियां चाट, चाटकर
खाते हैं। लेकिन जिनसे तुलना करके आप परेशान हो रही हैं वे कहानी भले ही अच्छी
लिखती हों, पर भोजन उतना अच्छा नहीं बना पातीं। क्या वे आपसे कभी तुलना करके
परेशान होती हैं? फिर आप ही क्यों हों?
अपनी उपलब्धियों के बारे में सोचें – दूसरों में बहुत
कुछ हासिल कर लिया और आपने कुछ ही हासिल नहीं किया? अगर ऐसा सोचती हैं,
तो गलत है। हर व्यक्ति अपने खाते में सैंकड़ों छोटी बड़ी उपलब्धियां रखता है। आप
घर का खर्च ठीक से चला रहे हैं, सेहतमंद हैं, आपके पास आपका फ्लैट है, आपके बच्चे
पढ़ने में औसत से अच्छे या आपको अच्छी नौकरी मिली है तो आप बहुत सारे दूसरे लोगोंसे
कहीं बेहतर स्थिति में हैं।


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