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पॉजिटिव हो ‘सेल्फ इमेज’


पॉजिटिव हो ‘सेल्फ इमेज’

‘सेल्फ इमेज’ एक मानसिक तस्वीर है जो कोई व्यक्ति खुद के बारे में बनाता है। यह आत्म छवि जीवन में कड़वे-मीठे अनुभवों व जिन्दगी के प्रति आपके नजरिए से बनती है। इसमें हमारे आत्मविश्वास की बड़ी भूमिका होती है। हम खुद को कितना मूल्यवान आंकते हैं, खुद से कितना प्यार करते हैं और खुद को कितना स्वीकार करते हैं, इन सब पर ही आत्मछवि के अच्छा या बुरा होने का दारोमदार होता है। जिन लोगों को अपनी ही आलोचना करने, खुद को कोसने या कमतर आंकने की आदत पड़ जाती है, वे जिंदगी में कभी कुछ अच्छा नहीं कर पाते। ये बस किसी तरह अपना जीवन बिताते चले जाते हैं, लेकिन जिंदगी को जी भर के न तो जी पाते हैं और न कुछ बड़ा और उल्लेखनीय कर पाते हैं। इसलिए हमें अपनी आत्मछवि बेहतर गढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।


नुकसान कमजोर आत्मछवि और लो सेल्फ एस्टीम के

v  निर्णय लेने की क्षमता नहीं रहती। हर वक्त डर लगता है कि कोई गलती न हो जाए।
v  हर वक्त उदासी घेरे रखती है और खुलकर न हंस पाते हैं, न किसी जोक का लुफ्त उठा पाते हैं।
v  दूसरों के साथ कभी घुलमिल नहीं पाते। हमेशा संशय की स्थिति में रहते हैं।
v  हर काम के लिए, कहीं आने जाने के लिए दूसरों का सहारा ढूंढ़ते हैं या उनके अप्रूवल की अपेक्षा करते हैं।
v  अपनी सच्ची भावनाओं को लगातार छिपाने की कोशिश करते हैं और झूठ या बातों को बढ़ाचढ़ाकर बोलते हैं।
v  अलग-अलग रहना चाहते हैं और कुछ भी बोलने से कतराते हैं कि कहीं दूसरों के द्वारा रिजेक्ट न कर दिए जाएं।
v  अपनी प्रशंसा करने या आपनी अचीवमेंट बताने से डरते हैं।
ध्यान रखें-
v  सभी लोगों का आलोचना को दिल से न लगाएं। जब भी कोई आलोचना करे, अपने विश्वासपात्र मित्र से उस बात पर चर्चा करें फिर कमजोरी को सुधारें।
v  योग्यता, आत्मविश्वास, साहस, सार्थक संवाद, कठिन परिश्रम और काम के प्रति समर्पण, सफलता का सबसे प्रचलित फार्मूला है, जिसके द्वारा दुनिया के करोड़ों लोग सफलता प्राप्त कर चुके हैं।
v  अपने अंदर आत्मविश्वास रखें कि आप दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। फिर पीछे मुड़कर न देखें.
v   हंसते हुए जीवन गुजारें क्योंकि जिंदादिली से ही सफलता की नींव पड़ती है।
ऐसे निखारें आत्मछवि और बढ़ाएं अपना आत्मसम्मान
v  घर में, सोशल फंक्शन्स में या वर्कप्लेस पर आगे बढ़कर जिम्मेदारी लें या कमान संभालें।
v  असफलताओं से हताश होने की बजाय नए सिरे से कोशिश करें।
v  अपनी अच्छाईयों और मजबूत पक्ष को पहचानें  और दूसरों के सामने उजागर करें।
v  अपने कमजोर पक्षों कर पहचान कर उन्हें दुरुस्त करने की कोशिश करें।
v  कभी भी तुलनात्मक हीनता न पालें और दूसरों के जैसा बनने की कोशिश में अपना सुकून न खोएं।
v  खुद को कोसने और अपराध बोध से ग्रस्त रहने की प्रवृत्ति से उबरें।
v  हमेशा मंचिल की चिंता न करें बल्कि जिंदगी के सफर को एंजाय करने की आदत डालें और खुशमिजाज रहें।
v  हमेशा साफ-सुथने कपड़े पहने, शेविंग करें और खुद को व्यवस्थित रखें और एनर्जेटिक रहें।

v   
जुट जाएं अपने ब्लाइंड एरिया को कम करने में-


इस दुनिया में कोई व्यक्ति ऐसा नहीं जिसमें कोई कमी न हो. हर व्यक्ति में कोई न कोई कमजोरी होती है। लेकिन आगे वही व्यक्ति बढ़ता है, जो अपनी कमजोरी को जानता है, उसे सुधारता है उससे उबर जाता है। इसके लिए जरुरत है अपने अंदर झांकने की. सालों पहले अमेरिकी वैज्ञानिकों जॉनिंगम व हैरी ने एक मॉडल तैयार किया। उन्होंने इस मॉडल को नाम दिया था जोहरी विंडो। इसके अनुसार हर व्यक्ति के व्यक्तित्व के चार फील्ड होते हैं। पहले फील्ड में वो बातें आती है, जो वह अपने बारे में खुद को भी पता हो और दूसरे भी जानते हैं। दूसरे फील्ड में वो बातें आती हैं, जो वह खुद को नहीं पता, लेकिन दूसरे जानते हैं. यही ‘ब्लाइंड एरिया’ कहा जाता है। तीसरा फील्ड उन बातों का है, जो वह खुद जानता है, लेकिन दूसरे नहीं जानते। इसे ‘सीक्रेट एरिया’ कहते हैं। चौथा फील्ड उन बातों का है जो न वह खुद जानता है और न दूसरे जानते हैं। हमें लोगों से बात करके अपने ब्लाइंड एरिया को जानना चाहिए और इसे कम करते जाना चाहिए।




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