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जिन्दगी का भी कर लें जरा हिसाब-किताब


जिन्दगी का भी कर लें जरा हिसाब-किताब

क्या आप किसी ऐसी गाड़ी में बैठना चाहेंगे जिसका न ब्रेक आपके वश में हो न एक्सीलेटर, और जब आपको न मंजिल का पता हो और न ठहराव का? या फिर क्या आप कोई ऐसा बिजनेस करना पसंद करेंगे, जिसकी कमाई या लाभ-नुकसान का आपको कोई आयडिया न हो? नहीं न! फिर ऐसी जिंदगी क्यों जिए जा रहे हैं जिसका न आपको लक्ष्य मालूम है, न क्या खोया-पाया इसकी जानकारी और न इसके मकसद का ही आपको कोई इल्म है?

जरा ठहरिये,सोचिये, फिर आगे बढिए--
      बेहतर होगा बिना कुछ जाने, बिना कुछ समझे बेतहाशा दौड़ते चले जाने की बजाय आप जरा सा ठहर जाएं और इस साल अपनी जिंदगी का जरा सा हिसाब-किताब कर लें। आपने अब तक जिंदगी से क्या पाया क्या खोया और आपका लक्ष्य क्या है इन्हें कैसे हासिल करेंगे इन बातों पर जरा गौर कर लें, तो जिंदगी को जीने का जा दोगुना हो जाएगा। क्योंकि तब आपको एक सार्थक जिंदगी जीने का अहसास होगा और मन में सुकून भी महसूस होगा।
किसी ने ठीक कहा है, ‘जिन्दगी सिर्फ आपके अस्तित्व का होना भऱ नहीं है बल्कि इसे सही मायने
 में जीना, लगातार आगे बढ़ना, कुछ हासिल करना और मुसीबतों पर जीत हासिल करना है।


बनाएँ जिंदगी की भी डायरी-
जैसे आप अपनी आय-व्यय का ब्यौरा एक डायरी में लिखते हैं वैसे ही एक डायरी में अपने लक्ष्य, उद्देश्य और प्राथमिकताओं को नोट करें। अब इसी डायरी में अब तक आपने क्या खोया और क्या पाया यह भी लिखें। आपने जो खोया उससे क्या सबक सीखा ये भी लिखें और कौन सी गलतियां इस साल नहीं दोहरानी हैं, यह भी।
जिन्दगी का यह हिसाब-किताब आपको न सिर्फ आत्म मूल्यांकन का मौका देगा बल्कि आपको बेवजह की उलझनों और बाहरी शोर से प्रभावित होने से भी बचाएगा। यकीन मानिए आप सच्चे मन से ऑडिट करने बैठेंगे तो, बात-बात पर रियेक्ट करने की बजाय क्रियेट करने की आदत सीख जाएंगे, जो आपकी जिन्दगी को एक नई और सकारात्मक दिशा देंगी। अगर आप अपनी जिंदगी को अपने हिसाब से जीना चाहते हैं, तो यह ऑडिट जरुरी है, वरना आपकी स्थिति तेज हवा में उड़ते सूखे पत्ते की मानिंद हो जाएगी।


समझें अपनी प्राथमिकताएं-
अगर आप हर वक्त अस्त-व्यस्त रहते हैं, लगातार काम के बोझ से दबे रहते हैं, पारिवारिक जिम्मेदारियों को ठीक से पूरा नही कर पा रहे और न ही अपने नजदीकी लोगों की उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं, तो फिर समझ लीजिए कि आपको अपनी प्राथमिकताओं की समझ नहीं है। इसलिए यह बेहद महत्वपूर्ण है कि आप अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों और लक्ष्य की एक स्पष्ट सूची बनाकर रखें। हां! इस आत्मसमीक्षा में आपको खुद के प्रति बेहद ईमानदार रहना होगा।
      लाइफ कोच एंव बिहेवियर एक्सपर्ट कहते हैं कि आपको यह मालूम होना चाहिए कि कौन से काम आपको खुशी देते हैं और किन लोगों से मिलकर आपको आत्मसंतुष्टि महसूस होती है।
      समीक्षा और हिसाब-किताब का यह क्रम एक रुटीन होना चाहिए जिसे आप हर तिमाही में जरुर करें। साल में चार नहीं भी संभव हो पाए तो दो बार यह काम जरुर होना चाहिए। क्योंकि समय के परिवर्तन के साथ आपके लक्ष्य और संतुष्टि देने वाले कामों में भी बदलाव आता रहता है।

हटाएँ बेकार चीजों को -
लाइफ ऑडिट के दौरान खुद से कुछ सवाल पूछें  जैसे- क्या मैं वही कर रही हूं जो मैं अपने जीवन से चाहती हूं? क्या मैं अपनी जिंदगी से संतुष्ट हूं? इन सवालों से जो जवाब मिलें उनसे आपको पता चल जाएगा कि आप  आधी से ज्यादा बेकार चीजों के पीछे भागती रही हैं और इसीलिए आपकी जिंदगी इतनी उलझी हुई और दुश्वार है। ऐसी सब चीजों को अपनी ‘टू डू लिस्ट’ से हटा दें।‘द लाइफ ऑडिट’  की लेखिका कैरोलीन राइटन कहती हैं, ‘इससे आपको अपनी जीवन यात्रा को समझने और अब तक की गई तरक्की या तरक्की में रुकावट बन रहे कारणों का पता चलता है। आपको यह भी पता चलता है कि आप कहां अटके हुए हैं। आपको अपनी इच्छाओं का भी पता चलता है।
      ‘मेक इट हैपेन’ के लेखक और लाइफ कोच अरविंद देवलिया बतातें हैं, ‘अपने जीवन में छोटे-छोटे सामान्य परिवर्तन कीजिए। अपनी जिंदगी के हर पहलू पर  नजर डालिए- करियर, हेल्थ, रिलेशनशिप और देखिए  आप क्या पसंद करते हैं और क्या बदलना चाहते हैं। इस दौरान पुरानी गलतियों को लेकर अपसेट बिल्कुल न हों। इसकी बजाय अपने भविष्य की प्लानिंग करें और सफलता के लिए छोटे-छोटे स्टेप उठाएं। ऐसे करेंगे तो आपकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाएगी।

ईमानदार हो आत्मसमीक्षा -
      ‘देवी, दिवा ऑर शी- डेविल’ और  ‘द स्मार्ट करियर वुमन‘स सर्वाइवल गाइड’ की लेखिका सुधा मेनन कुछ साल पहले एक बार अपने जीवन से पूरी तरह परेशान और असंतुष्ट हो गई थीं। अपने जीवन की समीक्षा करन पर उन्होंने पाया कि उनकी जिंदगी ओवर वर्क, थकान, बोरियत और पति की उदासीनता का शिकार हो चुकी थी। दरअसल पति बेहद सज्जन थे और कम बोलते थे। सुधा को लगा कि वे उनके प्रति उदासीन हैं। उन्होंने पति से खुलकर बात की, तो समस्या हल हो गया। वह वक्त उनकी जिन्दगी का टर्निंग प्वाइंट था। मेनन कहती हैं, ‘लेकिन आत्मसमीक्षा के लिए और लाइफ ऑडिट के लिए आपका ईमानदार और साहसी होना जरुरी है। तभी आपको सही नतीजे मिलेंगे।

साल की शुरुआत में ये काम करें –
 हर इच्छा लिखें – अपने करियर, दैनिक जरुरत और पर्सनल लाइफ से जुड़ी हर वो चीज नोट करें, जो आप चाहतें कि आपको हासिल होना चाहिए।
श्रेणीबद्ध करें – अपनी इच्छाओं को श्रेणीबद्ध करें। अलग-अलग कैटेगरी बनाएं- हेल्थ, फाइनेंस, रिलेशनशिप आदि।
प्राथमिकताएं जानें – अपनी प्राथमिकताओं को जानें। आपको जानना चाहिए कि शार्ट टर्म और लॉन्ग टर्म में कौन सी चीजें आपके लिए ज्यादा महत्व रखती हैं।
लक्ष्य निर्धारित करें – आपको जानना चाहिए कि आखिर आप अपनी जिंदगी से चाहते क्या हैं और आपका लक्ष्य क्या है? चाहे वह संबंधों को लेकर हों या फिर बिजनेस य़ा प्रोफेशन से जुड़े टार्गेट।
थक कर हार न मानें- दुश्वारियों से घबराकर रुक न जाएं और न ही आत्महत्या जैसे नकारात्मक ख्याल दिमाग में लाएं. अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था, ‘जिंदगी साइकिल की सवारी करनी जैसी है। इसमें संतुलन बनाए रखने के लिए आपको चलते रहना चाहिए।’

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