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सफलता की नौका डुबाता है डर


सफलता की नौका डुबाता है डर

डायलॉग पुराना है, ‘जो डर गया, समझो मर गया,’ लेकिन सोलह आना सही है। डरने की आदत न सिर्फ व्यक्तिगत जिंदगी बल्कि करियर लाइफ को भी चौपट कर देती है। कमजोर इच्छाशक्ति और निम्न आत्मविश्वास वाले लोगों को हर वक्त तरह-तरह के डर सताते हैं। ये डर ही इनकी सफलता की राह में बाधक बनते हैं। कहीं आपको भी डरने की आदत तो नहीं पड़ गई? यदि हां, तो इन बिंदुओं पर गौर फरमाएं-

असफलता का डर – अगर आप किसी भी बड़े, चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण काम को हाथ में लेने से इसलिए हिचकिचाते हैं या अकसर मना कर देते हैं कि कहीं आप असफल न हो जाएं, तो आप खुद अपनी तरक्की के रास्ते बंद कर रहे हैं। ऐसे में आपको अवार्ड या इन्क्रीमेंट तो दूर नौकरी बचाने के लिए भी सोचना पड़ेगा। डरने की बजाय विश्लेषण करें कि अगर आप उस काम य़ा प्रोजेक्ट में असफल हो गए तो आप क्या खोएंगे और जीत गए तो क्या पाएंगे। नमस्ते लंदन का वह डायलॉग याद करें, जब तक हार नहीं होती ना...तब तक आदमी जीता हुआ रहता है। इसलिए असफलता से डरने की बजाय अवसरों का फायदा उठाने की कोशिश करें। धूम-3 में कहा गया है, जो काम दुनिया को नामुमकिन लगे, वही मौका होता है करतब दिखाने का।

आलोचना का डर – कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। इसलिए कामकाज के दैरान होने वाली आलोचनाओं से डर जाना और उन्हीं की वजह से काम हाथ में न लेना या हिचकिचाना  आपके लिए ही नुकसानदायक है। ऐसे में आप पर कामचोर होने का आरो बी लग सकता है। इसलिए आलोचनाओं से घबराने की बजाय नए कामों को सीखने और पूरी जिम्मेदारी के साथ उन्हें करने में तत्परता दिखाएं। क्रिटिसिज्म से डरने की बजाय, ध्यान से उन बातों को सुनें और गौर करें कि यह आपको हतोत्साहित करने के लिए ही है या सचमुच आपकी कुछ कमियों को नोटिस किया गया है। अगर पॉजिटिव क्रिटिसिज्म है, तो उन कमियों को दूर करके आगे बढ़े।


बॉस का सामना करने में डर – काम करते-करते कई बार गलती भी हो जाती है। गलती उन्हीं से होती है, जो काम करते हैं। ऐसे में अगर आप उसे स्वीकार करने या बॉस के सामने हाजिर होने से डरते हैं, तो इससे बॉस और ज्यादा नाराज हो सकता है। अगर आप अप्रिय स्थितियों से बचने के लिए बार-बार ऐसा करते रहेंगे, तो माहौल ज्यादा खराब हो सकता है। इसलिए साहस के साथ स्थिति का मुकाबला करें और बॉस के सामने जाकर हकीकत बयान कर दें। जाहिर है, एक बार बॉस खरीखोटी सुनाएंगे, लेकिन फिर आप खुद को हल्का महसूस करेंगे और दोबारा आगे बढ़ सकेंगे।


डिसीजन लेने में डर – दुनिया में रहते हुए हर पल आपको कोई न कोई निर्णय लेना पड़ता है। जो लोग निर्णय लेने में हिचकिचाते हैं, वे अक्सर पिछड़ जाते हैं। अगर आप बहुत सारी जानकारियां होने और काफी विश्लेषण के बाद ही छोटे-छोटे निर्णय लेते हैं, तो आप देरी से निर्णय के शिकार हो सकते हैं। ध्यान रखिए, निर्णय जल्दी लेना जरुरी होता है। कोई भी निर्णय़ या तो गलत होगा या फिर सही। गलत निर्णय आगे के लिए सीख देगा और सही निर्णय आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त  करेगा। लेकिन देरी से निर्णय लेने या अनिर्णय का स्थिति आपको सफल होने से रोकती है। कम चुनौती और छोटे निर्णय त्वरित गति से लेने की आदत डालें। हां, बड़े निर्णयों के लिए आप समय ले सकते हैं। ये जवानी है दीवानी फिल्म का डायलॉग तो याद होगा- मैं उठना चाहता हूं, दौड़ना चाहता हूं, गिरना भी चाहता हूं, बस रुकना नहीं चाहता।

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