नजरिया बदलने से भी मिलती है खुशी
कुछ लोग हर वक्त अपनी किस्मत
को कोसते हुए नजर आते हैं और खुद को दुनिया का सबसे दुखी और बदकिस्मत इंसान मानते
हैं। इनसे मिलते ही ये अपने दुखड़े रोते नजर आएंगे और हालचाल पूछो तो कुछ रटे रटाए
नकारात्मक वाक्य कहेंगे, “बस... टाइम पास कर रहे हैं”, “चल रहा है ठीक ठाक”, “अपना
क्या, अपनी तो किस्मत ही फूटी हुई है” आदि। जबकि कुछ लोग हर वक्त एनर्जेटिक,
मुस्कुराते हुए औऱ खुश नजर आते हैं। आप जब भी इनसे मिलें और हालचाल पूछें, तो इनका
जवाब कुछ ऐसा है – “एकदम चंगा”, “फिट एंड फाइन”, “मस्ती है यार”, “ऊपर वाले की
मेहरबानी है जी”।
दरअसल यह फर्क
जिंदगी के प्रति नजरिए के कारण ज्यादा होता है। दुनिया में शायद ही कोई इंसान हो,
जिसके जीवन में कोई समस्या, या तकलीफ न हो, लेकिन कुछ लोग अपने पास उपलब्ध संसाधनों
और खुशियों का हिसाब ज्यादा रखते हैं, तो कुछ लोग अपनी कमियों और समस्याओं को ही
याद करते रहते हैं।
अगर हम ‘एटीट्यूड ऑफ ग्रैटीट्यूड’
यानी कृतज्ञता का नजरिया अपना लें और कुदरत के प्रति, अपने आसपास के लोगों के
प्रति आभारी होने की आदत डाल लें तो हमारी झोली सबको खुशियों से भरी नजर आएगी।
संतुष्ट, खुश और आभारी होने के बहुत सारे कारण हम सब के पास होते हैं। आइए नजर
डालते हैं इन काऱणों पर –
इसलिए खुद को ब्लेस्ड फील करें औऱ ऊपर वाले या
अपनी किस्मत के प्रति कृतज्ञ होने की आदत डालें, जिससे आपको इतना कुछ दिया है।
इससे आपको खुशी मिलेगी, उत्साहपूर्वक कार्यकरने की ऊर्जा मिलेगी और आगे बढ़ने की
प्रेरणा मिलेगी। इन सबसे लिए दिन में कम से कम एक बार ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त
करने की आदत जरूर डालें। इससे आपकी खुशियां कई गुणा बढ़ जाएंगी।

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