Skip to main content

उम्मीद का दामन थामे रहिए


उम्मीद का दामन थामे रहिए
      कन्फ्यूशियस ने कहा था, “हमारी सबसे बड़ी महिमा कभी न गिरने में नहीं है, बल्कि गिरने के बाद फिर उठ खड़े होने में है.”  परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है, परिथितियाँ हमेशा अच्छी और आपके फेवर में नहीं रहतीं. कई बार परिस्थितियां लगातार विपरीत होती चली जाती हैं और लगता है कि अब जिंदगी में कुछ भी अच्छा नहीं रहा। चारों ओर अंधकार नजर आने लगता है और जिंदगी से ऊब सी होने लगती है। ऐसे में कमजोर लोग या तो हताश होकर अवसाद में डूब जाते हैं या फिर अपनी जिंदगी से पीछा छुड़ाने के लिए आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। ये दोनों ही बातें गलत हैं। आपको अपनी जिंदगी का कंट्रोलर खुद बनना चाहिए और उम्मीद का दामन थामे रहना चाहिए।

     वक्त को बदलते देर नहीं लगती बस जरा से धैर्य और हिम्मत की जरूरत है। अपने दृढ़ निश्चय के बूते इस दुनिया में सैंकडों लोगो ने ऊंचाइयां हासिल की हैं.

      ‘चिकन सूप फॉर द सोल’ सीरीज के रचयिता जैक केनफील्ड इस किताब को लिखने से पहले भारी कर्ज में डूबे हुए थे। उम्मीद का दामन थामे रखने की सलाह देने वाली केनफील्ड की यह किताब दुनियाभर में 100 मिलियन कॉपियों की बिक्री के साथ सफलता का परचम लहरा चुकी है।

      लंगड़े होने के बावजूद शेक्सपियर महान लेखक बने,जॉन मिल्टन अंधे थे फिर भी उन्होंने चर्चित महान कविता पैराडाईज लोस्ट लिखी, महान दार्शनिक कनफ्यूसियस अनाथ थे, बिजनेस टाइकून धीरूभाई अम्बानी का बचपन गरीबी में बीता...लेकिन इन लोगों ने आगे बढ़ने की उम्मीद कभी नहीं छोड़ी. इसीलिए आगे बढ़ पाए. मार्टिन लूथर किंग ने कहा है, “जीवन में दुःख आना वाकई दुखद है,लेकिन दुखों के बिना हम जीवन जीने की कला को नहीं सीख पाएंगे.” मुश्किल वक्त का सबसे बड़ा सहारा है ‘उम्मीद’!  जो एक प्यारी सी मुस्कान देकर कानों में धीरे से कहती है, ‘लगे रहो,सब अच्छा होगा’।

एटिट्यूड बदलें, सोल्यूशन मिलेगा – मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है, जैसा वो विश्वास करता है वैसा वो बन जाता है. ‘बी द क्वीन ऑफ युअर लाइफ’ की लेखिकाओं कैथी किन्ने और सिंडी रैज़लाफ ने लिखा है, ‘आपकी जिंदगी आपके नजरिए पर निर्भर करती हैं। आप खुद अपनी सभी समस्याओं का सोल्यूशन ढ़ूंढ़ सकती हैं और ऐसा करना बहुत आसान हैं। खुद के लिए अमेजिंग बनें। अपने सपनों को सच करे केलिए छोटे-छोटे कदम बढ़ाएं। उम्मीदों को गहरी सांस से भीतर ग्रहण करें और अपने डर व आशंकाओं को सांस के जरिए बाहर निकाल फेंकें।हमारी सभी समस्याओं और दुखों की जड़ आत्मविश्वास की कमी है.मन की दुर्बलता शारीरिक कमजोरी से भी ज्यादा नुकसानदेह है.यह इंसान को भीतर से पूरी तरह खोखला बना देती है. इसलिए सबसे बड़ी जरुरत इस बात की है कि नकारात्मक बातों से पूरी तरह तौबा कर लें।

अपनी क्षमता को पहचानें – अपनी जिंदगी में खुशियां बटोरने की चाबी दूसरों के पास नहीं बल्कि खुद हमारे पास होती है। बस आपको इस बात को जानना होगा कि किन चीजों पर आपका नियंत्रण है और किन मामलों में आप चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते। अपनी किताब ‘यस यू कैन रीगेन कंट्रोल ऑफ युअर लाइफ एंड बी हैप्पी अगेन’ में लेखक ब्राहिम डेरडर ने लिखा है कि जिंदगी की दैनिक, साप्ताहिक और मासिक चुनौतियों को निरंतर मैनेज करते रहना जरूरी है। जिन चीजों पर आपका नियंत्रण नहीं उनके बारे में सोचकर दुखी होने की बजाय नजरअंदाज करें और उन चीजों पर फोकस करें जिन पर आपका नियंत्रण है और उन्हें सुधार कर आप अपनी स्थिति को बेहतर बना सकते है.

बीत गयी सो बात गयी– जब वक्त बुरा चल रहा हो, तो व्यक्ति हताशा में लगातार पिछली बातों को भी याद करके दुखी रहने लगता है जबकि जो बीत गया उसे याद करके भी कोई फायदा नहीं। वर्तमान बुरा चल ही रहा है। बेहतर होगा कि आप कम से कम अपना भविष्य अच्छा बनाने के लिए निरंतर सचेष्ट रहें। ब्राहिम डेरडर कहते हैं, ‘इस वक्त आपका पहला कदम ये निश्चित करना कि आप चाहते क्या हैं कोई व्यावहारिक लक्ष्य निश्चित करें और फिर उसकी प्राप्ति में जुट जाएं। इससे आप दुखों की भूलेंगे व्यस्त हो जाएंगे औ अपना भविष्य बेहतर करने की तैयारी करेंगे।’ कई बार आपको अपनी खुशियों के लिए फिलॉसफर बनना पड़ता है। जिंदगी को एक दर्शनशास्त्री के नजरिए से देखें। खुद से कहें, जिंदगी बहुत छोटी है। जैसे अच्छी परिस्थिति या अच्छी चीजें लम्बी अवधि तक नहीं टिकतीं ठीक उसी प्रकार बुरा वक्त भी धीरे-धीरे गुजर ही जाएगा। खुद की प्रसंसा करें कि अब तक तो आपने जिंदगी में काफी कुछ हासिल किया है  और वो भी अपने दम पर.... तो फिर आगे भी आप ही इस मुसीबत से छुटकारा पाएंगे, वो भी एक बार फिर अपने ही दम पर। यकीन करें यह सोच आपको एक नई ऊर्जा से सराबोर कर देगी।


पॉजिटिव लोगों की संगत करें–आपके आसपास मौजूद लोग आपकी मनोस्थिति और निर्णयों को काफी प्रभावित करते हैं। नकारात्मक विचारों वाले और ईर्ष्यालु लोग आपको कभी न कतो आगे बढ़ने देंगे और न ही कुछ अच्छा सोचने देंगे। जबकि अच्छे, सहयोगी स्वभाव के और सकारात्मक विचार वाले लोग आपको मुसीबत की घड़ी में सदैव दिलासा देंगे और रचनात्मक आयडिया देंगे। विलियम ब्लेक ने कहा है जिंदगी असल में लोगों की अच्छाई का घटनाक्रम है। अच्छे लोग आते हैं और चले जाते हैं लेकिन अपने पीछे खुशी की तरंग छोड़ जाते हैं। लोगों को पहचानना सीखें और अच्छे लोगों की संगत करें।

धैर्य से काम लें– शेक्सपियर ने कहा है, “वे लोग बड़े गरीब हैं, जिनके पास धैर्य नहीं है.” पेड़ अपने झड़ते पत्तों, फलों या फूलों से कभी चिंतित नहीं होते, वे लगातार नए फल-फूल और पत्ते बनाने की प्रक्रिया में जुटे रहते हैं। इनसे सीखें और कुछ खोने, असफल होने या नुकसान होने पर धैर्य रखें। जिंदगी , जो खोया जा चुका उसके बारे में चिंता करने के लिए नहीं बल्कि आप अब भी क्या हासिल कर सकते हैं उसके विषय में चिंतन करने के लिए है। दुख या संकट के बारे में ज्यादा चिंता एंग्जायटी और अवसाद का रूप ले लेती है जो न तन की सेहत के लिए अच्छी है और न मन की शांति के लिए। इसलिए धैर्यपूर्वक नई राहें तलाशें और रोने-धोने या क्रोध करने की बजाय मनन करें। ध्यान रहे, आनंद एक आभास है जिसे हर कोई ढ़ूंढ़ रहा है, दुख एक अनुभव है जो हर किसी के पास है फिर भी जिंदगी में वही कामयाब है जिसको खुद पर विश्वास है।


हार न मानें –आपका खुश रहना या दुखी रहना आपके नजरिए पर निर्भर करता है। क्याँ आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानती हैं ,जिसे कभी किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा? मुश्किलें सभी के सामने आती हैं. बस फर्क इतना ही है कि आप दृढ़निश्चयी हों तो सब कुछ हैंडल कर सकते हैं, वरना निराशा में खुद को हारा हुआ महसूस कर समस्या को बढ़ा लेते हैं। जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाना है तो पराजित नहीं दृढ़ निश्चयी बनिए। सावधानी से सोचिए कि आप अच्छी जिंदगी जीने के लिए अपनी तरफ से क्या बेस्ट एफर्ट कर सकते हैं और किसी शुभचिंतक से मशविरा लेते हुए अपना आगे का मार्ग तय करें। ऐसा करने पर आप हर दिन परिवर्तन महसूस कर सकेंगे। सारा दारोमदार इस बात पर है कि हम कैसा महसूस करते हैं। हमारी फीलिंग्स यूनिवर्स में तरंग भेजती है और उसी स्तर पर ब्रह्मांड में व्याप्त अन्य तरंगें जिंदगी की ओर खिंची चली आती हैं। अधिकतर लोग खराब या नकारात्मक बातें ज्यादा सोचते हैं। आप निगेटिव सोचेंगे, तो जिंदगी में नकारात्मकता रहेगी।’

अपने अनुभव और ज्ञान का इस्तेमाल करें – बीते समय में हासिल किए गए अपने अनुभवों और ज्ञान का इस्तेमाल कर आप जीवन के कठोर से कठोर वार को झेल सकते हैं। अतीत में आपने जो संघर्ष किये हैं और जिनके दम पर आज आपका अस्तित्व या समाज में पहचान है, उन्हें याद करें और अपनी ताकत को पहचानें. ऐसा करने से आप न केवल अपनी अंदरूनी ताकत को समझेंगी बल्कि भावनात्मक मजबूती भी महसूस करेंगे. किसी विद्वान ने कहा भी है, अंत में केवल तीन बातें महत्वपूर्ण होती हैं। पहली यह कि आपने दुनिया और इसमें रहने वालों को कितना प्यार दिया। दूसरी यह कि आपने जीवन को कितनी शिष्टता से जिया और तीसरी यह कि कितनी शालीनता से आपने उन चीजों का त्याग किया, जो आपके लिए बनी ही नहीं थीं। इन पर विचार करके आप बहुत ताकतवर बन सकते हैं। हो सकता है, वर्तमान समय आपको सही न लगे लेकिन भविष्य में जब आप पीछे मुड़कर देखेंगे तो आपको गर्व होगा कि आपने मुश्किलों से पार पाई और अब आप पहले से ज्यादा मजबूत, समझदार और भविष्य के लिए तैयार गए हैं।

मैदान में डटे रहें– विपरीत परिस्थिति में पलायन करके आपको कुछ हासिल नहीं होगा। गली में भौंकते कुत्तों से डरकर आप भागते हैं तो वे भी आपके पीछे ज्यादा तेज आवाज में भौंकते हुए भागने लगते हैं लेकिन जब आप डटकर खड़े हो जाते हैं और उन्हें घूरकर देखने लगते हैं तो वे भी नहीं रूक कर कूं-कूं करने लगते हैं। बिल्कुल ही आपकी मुसीबतों की स्थिति है। आप इनसे दूर भागेंगे तो ये आपका पीछा करेंगे और डटकर मुकाबला करेंगे तो इनकी ताकत और भयावहता लगातार क्षीण होती चली जाएगी। आपसे कहीं गलती हुई है तो उसका आकलन करें. गलती पकड़ में आ जाए तो उसे सुधारें और फिर आगे बढ़ें. अगर आप गौर से देखेंगे तो समस्या में ही समाधान नजर आ जाएगा. बस आपके मन में उसे ढूँढने का हौसला होना चाहिए. न भूलें कि हर रात की एक सुबह होती है.

Comments

Popular posts from this blog

तुलनात्मक हीनता से उबरना है जरूरी

तुलनात्मक हीनता से उबरना है जरूरी     बहुत प्रचलित उक्ति है, ‘दुनिया में ज्यादातर लोग अपने दुख से कम दुखी होते हैं, लेकिन दूसरों के सुख से उन्हें ज्यादा दुख पहुंचता है।’ यह सच भी है। कई लोग दूसरों को तरक्की करते देख जलते भुनते हैं और उनके साथ अपनी तुलना करके हीन भावना से ग्रस्त हो जाते हैं। तुलना और उलाहना से होगा नुक्सान-   कई लोग कई बार संबंधित व्यक्ति से जुड़े लोगों से लड़ बैठते हैं कि आप फलां का फेवर करते हो, उन्हें सपोर्ट देते हो और हमें काम नहीं देते। ऐसा करने से सिवाय दोहरे नुकसान के और कुछ भी हासिल नहीं होता। एक तो लोगों के बीच शिकायतकर्ता की इमेज खराब हो जाती है और लोग उसे ईर्ष्यालु व रोनू (शिकायती) प्रवृत्ति का समझकर उससे दूर रहने लगते हैं। दूसरा नुकसान यह कि ऐसा व्यक्ति अपनी कमियों का आकलन करके खुद क्षमता सम्पन्न बनने की बजाय सिर्फ दूसरों में ऐब खोजता रह जाता है। सकारात्मक सोचें और बोलें – जब भी आपको दूसरों से मदद या काम मांगना हो, कोई सलाह लेनी हो या कोई प्रोडक्ट अथवा सर्विस बेचनी हो, तो आप अपनी बातों को अपनी जरूरत प्रॉडक्ट या सर्विस पर फोकस करें।...

लोगों के दिलों पर राज करेंगे आप

लोगों के दिलों पर राज करेंगे आप आप भी बन सकते हैं लोकप्रिय लोगों के बीच पॉपुलर होने के लिए न तो आसमान से तारे तोड़ने की जरुरत है न लाखों रूपए खर्च करने की. बस अपने स्वभाव और एक्टिविटीज में छोटे छोटे परिवर्तन करना काफी है- थैक्यू बोलना सीखें - जो लोग आपको खुशी देते हैं,आपके लिए कुछ अच्छा करते हैं ,आपकी  वक्त-बेवक्त मदद करते हैं और आपके प्रति स्नेह का भाव रखते हैं, उनके प्रति आभार जताने की आदत डालें। उन्हें समय-समय पर उपहार व मिठाई आदि दें। इससे उनके साथ आपके रिश्तों में और भी प्रगाढ़ता आएगी और आपका सपोर्ट सिस्टम भी इम्प्रूव होगा। दयालु बनें- दयालुता संक्रामक होती है। जब आप कुछ अच्छा करते हैं, तो दूसरों का मन भी कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित होता है। स्टैनफोर्ड और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को शोधकर्ताओं ने पाया है कि लोगों में दूसरों की पॉजिटिव चीजों की नकल करने की आदत होती है। इस प्रवृत्ति को ‘कन्फॉर्मिटी’ कहते हैं। जब आप देते हैं, तो दूसरे लोग और वे खुद (जिनके लिए आपने अच्छा किया) भी किसी दूसरे के प्रति ऐसा करने को उतावला हो जाता है। इससे सकारात्मकता बढ़ती है। नै...

इतना मिला है फिर क्या गिला है?

इतना मिला है फिर क्या गिला है ?       कुछ लोग हमेशा चिंता में डूबे और मुंह लटकाए रहते हैं। उन्हें अपने जिंदगी से, तकदीर से और ऊपर वाले से हजारों शिकायतें होती हैं। इन्हें लगता है कि सिर्फ इनके अलावा दुनिया में सब सुखी हैं। जबकि सच यह है कि ईश्वर ने, किस्मत और इस कुदरत ने सबको हजारों नेमतें दी हैं। लेकिन हर व्यक्ति के पास सब कुछ कैसे हो सकता है ? इच्छाएं और उम्मीदें अशेष होती हैं, इनका कभी कोई अंत नहीं होता। सोच का शिकार हो चुका हर इंसान सोचता है। यकीन मानिए जिन्हें आप खुद से बहुत आगे, खुशकिस्मत और सुखी इंसान समझती हैं उनके पास अगर आपसे अलग कुछ है तो वो है उनकी सकारात्मक सोच और जिंदादिली। हां, इससे इंकार नहीं कि कुछ मामलों में वे आपसे बढ़कर या बेहतर होंगे, लेकिन यह भी गलत नहीं कि कई चीजें जो आपको हासिल हैं, वो उनके नसीब में नहीं। जरा डालकर देखिए एक नजर कि आपको कितना कुछ मिला है, फिर भी आपको ईश्वर से मिला है – आपको मिला अपनी पसंद का जीवनसाथी – अगर आपका जीवनसाथी अच्छे स्वभाव का व केअरिंग है और शादी से पहले माता-पिता ने आपसे रजामंदी ली या फिर आपने अ...