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पोजिटिव एटीट्यूड है सफलता का सारथी


पोजिटिव एटीट्यूड है सफलता का सारथी

      आप सफलता के रथ पर सवार होकर जिंदगी की मंजिल को तय करना चाहते हैं, तो ध्यान रहे आपका सारथी आपका ‘पौजिटिव एटीट्यूड’ यानी चीजों को देखने का सही नजरिया होना चाहिए। कड़ी मेहनत, जानकारी और धन होने के बावजूद अगर आपका नजरिया सही नहीं है, तो आपका रथ कहीं भी, किसी भी वक्त अटक सकता है। आपने देखा होगा कि एक ही क्लास में, उन्हीं शिक्षकों से पढ़ने वाले कुछ स्टूडेंट काफी इंटेलीजेंट होते हैं, जबकि कुछ लोग घिसट घिसट कर पास होते हैं, एक ही संस्थान में एक जैसे पद पर काम करने वाले दो लोगों में से एक काफी लोकप्रिय या तेजतर्रार हो सकता है जबकि दूसरा बस अपनी ड्यूटी पूरी कर रहा होता है, एक ही मार्केट में कपड़े या मिठाई की दो दुकानें होती हैं, उनमें सामान में लगभग एक जैसा होता है लेकिन एक दुकानदार को दम मारने की फुर्सत नहीं होती जबकि दूसरा अपनी कुर्सी पर बैठा ऊंघ रहा होता है। ऐसे उदाहरण आपको डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, पुलिस ऑफिसर या अन्य पेशेवर लोगों के भी मिल जाएंगे। आपने कई ऐसे उदाहरण भी देखे होंगे कि कोई फर्म या कंपनी एक एंटरप्रेन्योर की देखरेख मे डूबने की कगार पर पहुंच जाती है, लेकिन जब कोई दूसरा एंटरप्रेन्योर उसका अधिग्रहण करता है तो चंद दिनों में ही लड़खड़ाता फर्म फिर से संभल जाता है औऱ नई ऊंचाइयों को छूने लगता है। जाहिर सी बात है, यहां सफलता या विफलता की वजह संसाधन या मार्केट नहीं बल्कि व्यक्ति विशेष की काम के प्रति सोच और नजरिया होता है। हर आदमी के सोचने का अपना तरीका होता है। सोच की सही दिशा आपको सफलता की ऊंचाइयों पर ले जाती है जबकि गलत सोच और रवैया विफलता की खाई में धकेल देते हैं –

चुनौतियां लेने में हिचक कैसी – व्यक्तिगत या व्यावसायिक जिंदगी में हर रोज आपके सामने बीते दिनों से कुछ हटकर और कुछ नया करने की चुनौती होती है। इसके साथ ही मौजूदा रणनीति के विफल हो जाने का डर भी होता है। अब यह आपको तय करना होता है कि आप विफलता के डर को खुद पर हावी होने देते हैं या साहस जुटाकर नई रणनीतियों को भी अपनाने में नहीं हिचकते। अधिकतर सफल होने वाले एंटरप्रेन्योर्स के एटीट्यूड में डर के साथ साथ संभावनाओं को देखने की नजर भी होती है। हम आस पास वही देखते हैं, जो हमारी सोच है। अगर हम डरे हुए हैं, तो आसपास डर पैदा करने वाली चीजें ही नजर आएंगी। अगर हम खुश हैं, तो आस पास खुशी देने वाली चीजें नजर आएंगे। कहा गया है कि नजर बदलोगे तो नजारा बदल जाएगा। हमें अपनी सोच के दायरे से बाहर निकलना होगा। जो व्यक्ति जीवन में जितनी ज्यादा चुनौतियों का सामना करता है वह उतना ही सफल होत है। चुनौतियां आपकी शक्तियों को जगा देती हैं, इसलिए चुनौतियां लें। बने बनाए ढर्रे पर काम करते रह कर तय रेवेन्यू जुटाने में कोई रोमांच नहीं है. निरंतर नई सफलता अर्जित करने वाले एंटरप्रेन्योर्स नए –नए क्षेत्रों औऱ नई-नई रणनीतियों से जुड़कर रिस्क उठाने के लिए आगे बढ़ते हैं। वे विफल भी होते हैं, पर तब भी वे प्रयास करते हैं।

अकेले नहीं टीम वर्क को दें प्राथमिकता – कई लोगों को अपनी क्षमताओं साबित करने के लिए बड़े काम अकेले अपने हाथ मे रखने की सनक होती है। ऐसा गलत तो नहीं कहा जा सकता लेकिन आपके पास सहयोगी लोगों की टीम मौजूद होने पर ऐसा किया जाए तो यह गलत होगा। इसलिए सफल एंटरप्रेन्योर्स हर जिम्मेदारी को अपने ऊपर ओढ़ लेने के बजाय जिम्मेदारियों का बंटवारा करते हैं। वे हर काम में परफेक्शन सुनिश्चित करते हैं। कंपनी के टीम वर्क के दम पर किसी क्षेत्र में मिली सफलता का सेहरा मैनेजमेंट या बोर्ड डायरेक्टर्स मे से किसी व्यक्ति के सिर पर बांध देना दरअसल टीम की मेहनत को नजरअंदाज करना है। सफल एंटरप्रेन्योर्स अपने वर्कफोर्स के मोरल को बूस्ट करने के लिए उनकी मेहनत का श्रेय कभी भी उन्हें देना भूलते नहीं हैं। यह श्रेय कभी वे सामूहिक भोज रखकर देते हैं तो कभी बेहतरीन एंप्लॉइज को सम्मानित करके। इससे एक जुड़ाव की भावना पैदा होती है। बिजनेस में सफलता के लिए जरूरी है कि अपने एम्प्लॉइज के अंदर यह भावना पैदा की जाए कि अच्छा काम करने पर उन्हें पुरस्कार मिलेगा और गलत काम करने पर उन्हें दंडित भी किया जा सकता है।

नाम के साथ काम पर जोर – आज का युग प्रचार का युग है। जो दिखता है, जो बिकता है। इसलिए ध्यान रखें कि आपकी कंपनी औऱ इसके प्रोडक्ट या सेवाओंका समुचित विज्ञापन औऱ प्रचार हो। लोग कम्पनी को उसके नाम से या ब्राण्ड नेम से पहचानते हों। पर साथ ही साथ सर्विस और उत्पादों की गुणवत्ता पर भी जोर देना जरूरी है। सफलता का स्वाद चखने वाले एंटरप्रेन्योर्स प्रचार में यकीन रखते हैं, लेकिन कंपनी के काम और डिलीवरी में इसके आगे कोताही नहीं बरतते हैं। वे इस बात को भली भांति समझते हैं कि अपने प्रोडक्ट और सर्विसेज का प्रचार करके लोगों को आकर्षित किया जा सकता है, लेकिन वे इस बात को भी जानते हैं कि सर्विस में कमी होने पर सिर्फ प्रचार के दम पर जुटाई गई यह सारी भीड़ दूर हो सकती है। इसलिए वे काम और नाम दोनों में बैलेंस बैठाकर चलते हैं। सिर्फ अपने प्रचार या दूसरेके दुष्प्रचार पर नहीं चलते। बिजनेस में प्रोडक्ट या सर्विस में सुधार करने पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए।

रणनीति में बदलाव जरूरी – एक ही ट्रिक बार बार काम नहीं करती। समय और परिस्थिति के अनुसार अपनी सोच,काम के तरीके और रणनीति में निरंतर बदलाव लाते रहना जरूरी है। बेहतर स्ट्रेटेजी बनाने के लिए जरूरी है कि आपके मन में सवाल कभी खत्म न हों। बने-बनाए पुराने ढर्रों पर ही चलते रहने वालोंसे नए स्टैण्डर्ड सेट करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। किसी की भी राय सिर्फ इसलिए न मान लें कि आप उसका लिहाज करते हैं। एंटरप्रेन्योरशिप में लंबी पारी वही खेल सकते हैं जिन्हें अपने हर कदम पर उठने वाले क्यों औऱ कैसे का जवाब पता होता है। सफल एंटरप्रेन्योर्स किसी भी एक बार हुई चीज का बार बार होना तय मानकर नहीं चलते। वे मानते हैं कि जरूरी नहीं कि यदि पिछली बार जिस रणनीति से सफलता मिली थी, वही इस बार भी सफलता दिला ही देगी। या जरूरी नहीं कि एक बार हम किसी क्षेत्र मे विफल हुए तो कभी हम दोबारा उसमे अच्छा कर ही नहीं सकते। उनका जोर स्थिति के अनुकूल प्रयासों पर रहता है।

कर्मचारियों और ग्राहकों से मधुर संबंध – जीवन में अगर किसी व्यक्ति को हम ज्यादा महत्व देते हैं, तो वह खुश हो जाता हैं। आसपास के लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाने से जीवन आसान हो जाता है और हमें मदद भी मिलती है। कभी भी किसी व्यक्ति को अपमानित नहीं करना चाहिए क्योंकि कोई भी व्यक्ति कभी भी काम आ सकता है। जिन कंपनियों में एंप्लॉयर अपने एंप्लॉइज को महज एक कर्मचारी मानने के बजाय कंपनी की सफलता का एक अहम कारक मानते हैं और एंप्लॉई फ्रेंडली नीतियों को लागू करते हैं, वहां एंप्लॉयर्स इन लोगों से सहयोग अपेक्षाकृत ज्यादा आसानी से जुटा लेते हैं। डांट फटकार प्रोडक्टिविटी की गारंटी नहीं हो सकती है। बिजनेस में ह्यूमन रिसोर्स एक महत्वपूर्ण चीज होती है। इसलिए आपको अपने एम्प्लॉइज को आगे बढ़ने औऱ अपने साथ जुड़े रहने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इसके लिए आप कंपनी की ओर से एंटरप्रेन्योर होने के नते आपको नए विचारों का हमेशा स्वागत करना चाहिए। अपने पार्टनर्स, स्टेक होल्डर्स और क्लाइंट्स की इच्छाओं को आप अवॉयड नहीं कर सकते। यह ठीक है कि हर एक को संतुष्ट करना आसान नहीं। लेकिन ये लोग कंपनी का साथ छोड़कर जाएं इससे बेहतर है कि मुश्किल मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा करते रहें। जो रिस्क आप उठाना चाहते हों उसके लिए इन्हें कन्विंस  करने की जिम्मेदारी आप ही पर है।

फैसलों को लागू करना भी जरूरी –कुछ लोग अपना सारा समय योजनाएं बनाने में ही खपा देते हैं. जबकि डिसीजन मेकिंग में ऐनालिसिस के साथ साथ स्पीड का भी खास रोल है। अगर आप वक्त रहते फैसला नहीं ले पाते तो आप चाहे कितने भी सही फैसले पर क्यों न पहुंचे हों, वह किसी काम नहीं रहेगा। अच्छा डिसीजन मेकर अपनी थिंकिंग, ऐनालेसिस और डिसीजन में सामंजस्य बनाकर रखता है। ताकि बाद में पछताना न पड़े। दुनिया में सबसे ज्यादा लोग टालमटोल की बीमारी से परेशान हैं। जो काम हमे आज करना चाहिए, उसे हम कल करने के लिए छोड़ देते हैं औऱ बाद में उसे पूरा करना भूल जाते हैं। ज्यादतर लोग इसी वजह से अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाते, क्योंकि उन्हें मौजूदा परिस्थितियों को बदलने में कष्ट महसूस होता है। ऐसे लोग बदलाव से घबराते भी हैं। एंटरप्रेन्योर की सफलता का आकलन इस आधार पर होता है कि उसकी कंपनी जो अपना लक्ष्य लेकर चली थी, वह उसे हासिल करने में सफल हुई कि नहीं। अब यह आपको तय करना है कि आप इस सफर में जो कुछ भी मिल जाता है, उसी से संतुष्ट हो जाते है या लगातार सभी रणनीति से अपने निर्धारित लक्ष्य की की ओर बढ़ते चले जाते हैं।


अनुशासन के लिए सख्ती भी जरूरी – अगर आप टीम लीडर हैं तो आपको पुरस्कार औऱ दंड की प्रक्रिया को समझना चाहिए। अगर कोई एम्प्लॉई अच्छा काम कर रहा है, पर टीम वर्क में अनुशासित नहीं है, तो उसे रिवॉर्ड नही मिलना चाहिए। वहीं ऐसे अनुशासित एम्प्लॉई जो परफॉर्मर नहीं हैं, उन्हें भी रिवॉर्ड देने से बचना चाहिए। जब भी मीटिंग में टारगेट औऱ रिजल्ट्स की बात करें, तो टीम के हर सदस्य को पता होना चाहिए कि आप उनसे क्या चाहते हैं। अगर टीम मेंबर्स के सामने उनके लक्ष्य तय होंगे, तो वे पूरी मुस्तैदी से काम में जुट जाएंगे। इससे टीम में अनुशासन बना रहेगा और टीम भी मजबूत बनेगी। हर एम्प्लॉई खुद अपने काम के बार में सही सही आकलन नहीं कर सकता। इसलिए आपको उसको चैक करना चाहिए।  अगर किसी एम्पलॉई का व्यवहार सही नहीं है, तो सबसे पहले उससे बात करें औऱ समझाएं। फिर भी यही व्यवहार जारी रहता है, उसे वार्निंग लैटर भी भेज सकते हैं। एक बॉस के तौर पर अनुशासनहीन एम्पलॉई को कई टीम टास्क भी दे सकते हैं। इससे एम्पलॉई को अपनी जिम्मेदारी का अहसास होने लगता है।

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