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अच्छी आदत है सलाम नमस्ते!





अच्छी आदत है सलाम नमस्ते!


 एक जमाना था जब किसी गांव में रहने वाला हर शख्स एक दूसरे को न सिर्फ नाम से जानता था बल्कि उसके परिवार के बारे में भी काफी हद तक जानकारी रखता था। तब गांव के लोग एक दूसरे से मिलने पर चलते-चलते ही सही ‘राम-राम’ ‘सलाम वालेकुम’ या ‘सत श्री अकाल’ जैसे अभिवादन का आदान प्रदान जरूर करते थे। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि एक ही सोसायटी या अपार्टमेंट अथवा बिल्डिंग में रहने वाले दो लोग न तो एक दूसरे को नाम से जानते हैं और न ही उनमें कभी कोई बातचीत होती है।


कौन है अजनबी?
 अक्सर कुछ लोग कहते हैं कि किसी अजनबी से भला क्या अभिवादन किया जाए। लेकिन यह गलत नजरिया है। एक ही अपार्टमेंट या सोसायटी या फिर ऑफिस प्रेमिसेस में रहने वाले लोग अजनबी नहीं कहे जा सकते। वैसे तो एक ही छत के नीचे रहने वाले सगे भाई-बहन भी जब एक-दूसरे से बातचीत नहीं करते तो अजनबी ही कहलाते हैं. इसलिए यह संकोच त्यागिये और आगे बढकर लोगों से पहचान बढ़ाइए.

आप ही होंगे पॉपुलर -

  अगर आप पहल करके लोगों से सलाम-नमस्ते यानी मुस्कुराकर अभिवादन करने की आदत डालते हैं, तो इसका सकारात्मक असर शीघ्र ही देख सकते हैं। इससे जल्दी ही आपकी छवि एक मिलनसार, खुशमिजाज और सामाजिक सोसायटी व्यक्ति की बन जाएगी.आप अपने इर्द-गिर्द रहने वाले लोगों के बीच एक पॉपुलर इंसान बन जाएंगे.जबकि सामने मिलने पर भी बिना मुस्कुराए या बिना अभिवादन किए निकल जाने वाले लोगों को अहंकारी स्वभाव का माना जाता है। ऐसे लोगों से कोई घुलना मिलना पसंद नहीं करता। लोगों से हंसते मुस्कुराते अभिवादन की पहल करने वाले लोग सहज ही अजनबियों के साथ भी घुलमिल जाते हैं और शीघ्र ही उनसे आत्मीय परिचय भी स्थापित कर लेते हैं। अपनी जिंदादिली और बातचीत करने की आदत के कारण ऐसे लोगों के काम सरकारी दफ्तरों या कठिन जगहों पर भी आसानी से बन जाते हैं।

कला और शिष्टता है अभिवादन-

दरअसल लोगों को ग्रीट करना या उनसे सलाम नमस्ते करना भी एक कला है। यह कला हर उस व्यक्ति को सीखनी चाहिए जो समाज में अपनी प्रतिष्ठित छवि बनाना चाहता है। यह किसी व्यक्ति की उपस्थिति को दर्ज करने और उसे खास होने का अहसास कराने वाली एक सामान्य शिष्टाचार की प्रक्रिया है। इसलिए आदत डालें कि लिफ्ट में, सीढ़ियों में, गार्डन एरिया में, कोरीडोर में या जिम में जब कोई व्यक्ति मिले तो उससे गुडमॉर्निंग, नमस्ते, राम-राम, जय श्रीकृष्ण, राधे-राधे या अपने धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक अभिवादन स्वरूप कुछ न कुछ जरूर कहें। इससे वह व्यक्ति आपसे खुश होगा और आपके प्रति उसके दिल में इज्जत बढ़ेगी।

ऐसे करें अभिवादन-

 जब किसी से बातचीत की पहल करें या अभिवादन करें तो उस व्यक्ति से आई कॉन्टैक्ट जरूर रखें व साथ ही चेहरे पर हल्की मुस्कान भी रखें। व्यक्ति उम्रदराज है तो हाथ जोड़ते हुए अभिवादन करें। इससे अभिवादन गरिमामय होगा। पुरूषों के अनजान युवतियों या महिलाओं से शालीनतापूर्वक अभिवादन करना चाहिए। जब तक पहचान गाढ़ी न हो या वैसा रिश्ता न हो ज्यादा म़ॉडर्न बनने के चक्कर में आलिंगन या चुंबन आदि से अभिवादन करने की न सोचें। कहीं माहौल शांत या गमगीन हो और आपको किसी का अभिवादन करना हो तो उन्हें देखकर खड़े हो जाएं और हाथ जोड़ लें, इतना ही काफी है।

इम्प्रूव होगा सपोर्ट सिस्टम-

अभिवादन के मार्फत आप अपना सोशल नेटवर्क और सपोर्ट सिस्टम भी इम्प्रूव कर सकते हैं। इससे आपको कई फायदे मिलते हैं। समाज में पहचान पढ़ती है। बिजनेस का दायरा बढता है। ज्यादा लोगों से मिलने जुलने पर तरह-तरह की सूचनाएं मिलती हैं जो कई बार आर्थिक फायदा पहुंचाने वाली भी होती हैं। कई बार समस्य़ा में घिर जाने पर लोगों से मदद या अच्छी सलाह भी मिल जाती है, जिससे आपका काम आसान हो जाता है। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध बताते हैं कि सोशल नेचर के लोग आमतौर पर दूसरों की तुलना में खुशहाल और स्वस्थ रहते हैं।–

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